Free Fire Fansi – Virtual Game Addiction Aur Zindagi Ki Kahani
हँसी-खेल से भरी शामें अब मोबाइल की स्क्रीन में कैद थीं… दोस्ती के धागे टूट रहे थे, और एक गेम ने तीन जिंदगियों की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।" फ्रि फायर फांसी, जिंदगी नर्क शहर के बाहरी इलाके में एक कॉलोनी थी, जहाँ हर शाम ब मज़ाक करता था, और अमन, जो थोड़ा शांत और शर्मीला था। ये तीनों हर शाम साइकिल लेकर कॉलोनी के बाहर पहाड़ों की तरफ़ जाते और वहाँ बैठकर घंटों बातें करते थे। लेकिन अब उनका अड्डा बदल गया था। शाम होते ही, वे अपने-अपने घरों से निकलते, लेकिन हाथों में साइकिल की जगह मोबाइल होता। पहाड़ की एक सुनसान चोटी पर बैठकर, वे एक-दूसरे से बात किए बिना, अपनी स्क्रीन में डूबे रहते। वे अपने गेम के ग्रुप में थे, लेकिन असलियत में अकेले थे। उनकी दोस्ती की मज़बूत डोर, एक ऑनलाइन गेम के धागे से बँध गई थी। घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ: एक दिन विशाल के पिता, सुनील अंकल, ने देखा कि विशाल रात भर जागकर मोबाइल पर गेम खेल रहा है। अगले दिन स्कूल में, विशाल सोता हुआ पकड़ा गया। टीचर ने शिकायत की, "विशाल का ध्यान पढ़ाई में बिल्कुल नहीं है। वह अब लापरवाह हो गया है।" सुनील अंकल ने विशाल को डाँटा, ...